26 January speech in Hindi for 2021

26 January speech in Hindi for 2021

नमस्कार दोस्तों , अगर आप 26 January speech in Hindi for 2021 के लिए ढूंढ रहे हैं और आप अपनी republic day की स्पीच जोशीले अंदाज में देना चाहते हैं तो आप हमारे द्वारा लिखी गई गणतंत्र दिवस की speech को चुन सकते हैं।

हमने यह speech देशभक्ति को प्रकट करने के लिए लिखी है अगर आप भी अपने देश से सच्चा प्रेम करते हैं और विभिन्न व्यक्तियों को यह बताना चाहते हैं की देशभक्ति क्या होती तो आप इसे जरूर पढ़िए और अपने किसी कार्यक्रम में सुनाइए।

आप शुरुआत कुछ इस प्रकार से कर सकते हैं :

आज हम 72 गणतंत्र दिवस को मनाने के उपलक्ष्य में यहां इकट्ठे हुए हैं मैं आज अपनी तरह से कुछ पंक्तियाँ पेस करना चाहता हूँ जो आपको यह विचार करने पर मजबूर करेंगी की हमारे लिए देशभक्ति क्या है , अपनी देशभक्ति को कैसे प्रस्तुत किया जाए कैसे हम अपने देश के निर्माण में अपना योदान दे सकते हैं चलिए कुछ पंक्तियाँ सुनाता हूँ जो आपके देशप्रेम को उजागर करे और आपको उस रह पर चलने का आइना दिखाए।

26 January speech in Hindi for 2021 :

”हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इस मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं हिंदुस्तान कहते हैं ”

जो दुनिया में सुनाई दे उसे कहते हैं खामोशी जो आंखों में दिखाई दे उसे तूफान कहते हैं जो यह दीवार का सुराख है, साहब जो यह दीवार का सुराख है चाइना अमेरिका पाकिस्तान की साजिशों का हिस्सा है मगर हम इसे अपने घर का रोशनदान कहते हैं।

आजादी  का असली मतलब वही समझ सकता है जिसने कभी गुलामी की हो हम तो भाग्यशाली हैं कि हमने स्वतंत्र भारत में जन्म लिया है यूं तो आजादी की लॉ  1857 में ही जल चुकी थी जो मसाल बनकर 1947 में हमारे देश को आजाद करा गई। 

 प्राचीन मध्यकालीन और वर्तमान भारत के उदाहरणों से स्पष्ट करना चाहूंगा की जब हम फिरंगीयों के  फेरे में फंस गए थे तो रंग दे बसंती चोला की एक आवाज पर टोलों  के टोले उमड़  आते थे। और उनके वंदे मातरम के नारों से खून में आने वाला पांच 5 डिग्री का तूफान अंग्रेजी शासकों की जड़ों में तूफान ला देता था।

लोग मर जाते थे मिट जाते थे फांसी पर चढ़ जाते थे वह भी अपनी देशभक्ति साबित कर रहे होते थे क्योंकि उस दौर देशभक्ति की कसौटी थी।

उसके बाद 62 65 और 71 के युद्ध में अपना सुहाग गवा देने वाली औरतें जब घर के हालात यह हो जाया करते थे

“कि प्यार भी भरपूर गया मांग का सिंदूर गया नन्हे नौनिहालों की लंगोटिया चली गई छोटी बेटियों की चोटियां चली गई बाप की कमाई करी भाई की पढ़ाई गई ऐसा एक विस्फोट हुआ पता ही चला नहीं पूरे जिस्म की कई बोटियाँ चली  गई”

और आपके लिए तो एक आदमी मरा है साहब  किंतु मेरे घर के तो रोटियां चली गई मेरे घर की तो रोटियां चली गईं।

Republic day speech in Hindi for 2021 :

यह हालात पैदा हो जाने के बाद भी माँ बाप अपने बेटे को सड़क पर दुश्मनों की धज्जियां उड़ाने को छोड़ आए और उसे पत्र लिखकर भेजती थी की “अम्मा ने पत्र भेजा है बड़े चाव  से पुत्र मेरे सरहद पर चले जाना एक इंच भी कदम पीछे ना हट जाना इंच इंच  कट जाना चाहे इंच इंच कट  जाना”

इस प्रकार पूरा परिवार अपनी देशभक्ति साबित करना होता था।

तब देश बलिदान मांगता था तब देश लड़ जाने को कहता था तब देश मर जाने को मिट जाने को फांसी चढ़ जाने को कहता था।

किंतु आज देश लड़ जाने को नहीं कहता आज देश मर जाने को मिट जाने को नहीं कहता बल्कि मेरे विचारों सभी व्यक्ति अपना काम पूरी ईमानदारी से पूरी मेहनत से पूरी लगन से करे न तो वही सबसे बड़ा देशभक्त है।

मैं नहीं मानता कि फेसबुक व्हाट्सएप की प्रोफाइल पिक्चर को तीन रंग में रंग नाही देशभक्ति है।

और यदि आप कहेंगे कि साल में दो बार हाथ में तिरंगा ले लेना देश भक्ति है तो मैं पूछना चाहूंगा कि फुटपाथ पर रहने वाला बच्चा कड़कती धूप में नंगे पांव चलता हुआ तिरंगा बेच रहा होता है तो क्या आप उसे उसकी देशभक्ति कहेंगे।

यह उसकी देशभक्ति नहीं पेट की भूख की शक्ति हैं जो उसे ऐसा करने पर मजबूर करती है क्योंकि ना मस्जिद को जानते हैं ना मंदिर को जो पेट के भूखे होते हैं वह सिर्फ निवालों को जानते हैं।

अपने परिवार अपने समाज अपने देश के लिए  समर्पण का भाव ही देश भक्ति है हर देशद्रोही के जीवन में आने वाला तूफान ही है हमारी देश भक्ति है। ताकि हर देशद्रोही यह समझ सके कि अगर तू परिंदा है आसमान तेरा है अगर तू जिंदा है तो यह शमशान तेरा है भाईचारे से रहना है तो इस जमीन रह पर वरना यह कब्र भी तेरी है और यह कब्रिस्तान भी तेरा है।

लेकिन एक देशद्रोही से ज्यादा देशभक्ति तब प्रवाहित होती है जब एक बेटा बूढ़े मां बाप को वृद्धाश्रम  की चौखट पर छोड़ा आता है। 

कहां होती है देश भक्ति जब मुसीबत मैं फंसे व्यक्ति की जान बचाने से ज्यादा हम सेल्फी लेकर अपने लाइक बढ़ाने में लगे रहते हैं।

आज के इस दौर में वह युवा जिनके ऊपर जिम्मेदारी थी अपने देश की अपने समाज की अपने राष्ट्र की आशाओं को बांधे रखने की वह आज छोटी सी स्क्रीन पर अपनी उंगलियों के घर्षण करके इमोजी भेज कर अपना मौज मस्ती में लगा है।

“चार बोतल बोटका काम मेरा रोज का” ने भारत का भविष्य कर रखा है।

हम एक ऐसे समाज में जीते हैं जहां लड़कों से बात करता देख भाई हड़खाते हैं  वही भाई अपनी गर्लफ्रेंड के किस्से घर में हंस हंस के सुनाते हैं।

और मैं यह भी बता दूँ की महिला सुरक्षा के बारे में हम आज भी चौथे नंबर पर आते हैं हम एक ऐसे समाज में जीते हैं जहां एक पत्थर की मूरत को लगते हैं 56 भोग और भूखे नंगे लोग तड़पते सो जाते हैं।

लोग मजदूर को मजदूर समझिए मजबूर नहीं गरीब को काम दीजिए दान नहीं।

दान देने के इच्छुक हैं तो जीते जी रक्तदान दीजिए और मरने के बाद अंगदान दीजिए यही शक्ति देशभक्ति और सच्चा राष्ट्र प्रेम है।

“ना सरकार मेरी है ना रब मेरा है और ना ही एक बड़ा सा नाम मेरा है बस इतनी सी बात का गुरूर है मुझे कि मैं भारत का हूं और यह भारत मेरा है “

परंतु एक विचारिक बीमारी जो मुझे अपने समाज में नजर आती है कहा जाता है हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं जहां हिंदू पैदा होते हैं मुस्लिम सिख ईसाई भी पैदा होते हैं  लेकिन बदकिस्मती है अब इंसान पैदा नहीं होते हैं।

  और मेरे विचारों में ना हिंदू की जरूरत है ना मुस्लिम की जरूरत है ना ही सिख की जरूरत है ना इसाई की जरूरत है राष्ट्र निर्माण के लिए केवल एक अच्छे इंसान की जरूरत है।

“जरा सोच कर देखिए यह पेड़ पौधे बताएं भी परेशान हो जाए अगर परिंदे भी हिंदू मुस्लिम हो जाएं”

एक शैक्षणिक बीमारी भी मुझे अपने समाज में नजर आती है और बड़े ही आश्चर्य की बात है देश ने पूरी दुनिया को तक्षशिला और नालंदा जैसे  विश्वविद्यालय दिए जिन्होंने दुनिया में शिक्षा की बुनियाद रखी और आज विश्व के 100 सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय में हमारा एक भी विश्वविद्यालय खड़ा नहीं हो पाया।

जहां एक ओर हमारे पास आईआईटी , आई आई एम ,एनआईटी जैसे संस्थान है वहीं दूसरी ओर देश के गरीबों को बेरोजगारी की लपटों में घर के रखा है उनके हाथ में सिर्फ सर्व शिक्षा अभियान का झुनझुना पकड़ा दिया जाता है।

और मैं यह बता दूं कि इस शैक्षणिक बीमारी का एक कारण कि वह हमारे देश की शिक्षा नीति जो सिर्फ दो तरह के लोगों के लिए बनती है एक वह जो विद्वान है दूसरे वह जो धनवान है।

26 जनवरी speech in Hindi for 2021 :

इसी तरह की कई गजब की बीमारियां है इन बीमारियों की जड़ होना वह हमारा अंधविश्वास और मेरे विचारों में जब तक इस देश  का युवा अपनी सफलता के लिए मंदिरों में जा जाकर नारियल फोड़ तोड़कर भगवान को रिश्वत लगाता रहता है हमारे समाज का शिक्षक वर्ग बिल्ली के रास्ता काटने से खड़ा हो जाते हैं अपने धर्म अपनी जाति को ऊंचा मानना दूसरों के धर्म की अवहेलना करते रहना है तब तक ना तो देश से अंधविश्वास मिटेगा और ना ही हमारा राष्ट्र निर्माण संभव होगा।

हमारी संस्कृति हमारी सभ्यता को दुनिया में शीश झुकाया है  और मैं इस बात से दुखी हूं कि हमने आस्था के नाम पर अंधविश्वास फैलाया है।

मेरे विचारों में हमारा राष्ट्र निर्माण तब होगा जब इस देश में महिलाओं की पूजा नहीं इज्जत की जाएगी राष्ट्र निर्माण तब संभव होगा जब हम जाति का आरक्षण नहीं सामाजिक सशक्तिकरण के ऊपर बात करेंगे राष्ट्र निर्माण तब संभव होगा जब स्वच्छता अभियान में केवल सरकार नहीं सड़क पर चलने वाला हर एक नागरिक साथ आएगा।

स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत को अपने दिल से अपनाएगा।

असल मायने में हमारा राष्ट्र निर्माण  तब संभव होगा जब एक गरीब बच्चा भोजन के लिए नहीं ज्ञान के लिए स्कूल जाने की सोचेगा  हमारा राष्ट्र निर्माण तब तक संभव नहीं होगा जब जब एक नागरिक नैतिक रूप से सटीक, चरित्रिक रूप से भ्रष्ट ,मानसिक रूप से शैतान , धार्मिक रूप से अंधा , राजनीतिक रूप से गंदा  नहीं होगा।

बड़ी-बड़ी बातें नहीं छोटी-छोटी कोशिशें करनी होगी क्योंकि ठोकर हमें पहाड़ से नहीं पत्थर से लगा करती है.

अंत में जय हिन्द !

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